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पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद या ग़ौस / Pade Mujh Par Na Kuchh Uftad Ya Ghous

पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद, या ग़ौस ! मदद पर हो तेरी इमदाद, या ग़ौस ! उड़े तेरी तरफ़ बा'द-ए-फ़ना ख़ाक न हो मिट्टी मेरी बर्बाद, या ग़ौस ! मेरे दिल में बसें जल्वे तुम्हारे ये वीराना बने बग़दाद, या ग़ौस ! न भूलूँ भूल कर भी याद तेरी न याद आए किसी की याद, या ग़ौस ! मुरीदी ला-तख़फ़ फरमाते आओ बलाओं में है ये नाशाद, या ग़ौस ! गले तक आ गया सैलाब ग़म का चला मैं आइये फ़रियाद, या ग़ौस ! नशेमन से उड़ा कर भी न छोड़ा अभी है घात में सय्याद, या ग़ौस ! ख़मीदा सर गिरिफ़्तार-ए-क़ज़ा है कशीदा ख़ंजर-ए-जल्लाद, या ग़ौस ! अँधेरी रात, जंगल, मैं अकेला मदद का वक्त है फ़रियाद, या ग़ौस ! खिला दो ग़ुंचा-ए-ख़ातिर कि तुम हो बहार-ए-गुलशन-ए-ईजाद, या ग़ौस ! मेरे ग़म कि कहानी आप सुन लें कहूँ मैं किस से ये रूदाद, या ग़ौस ! रहूँ आज़ाद-ए-क़ैद-ए-'इश्क़ कब तक करो इस क़ैद से आज़ाद, या ग़ौस ! करोगे कब तक अच्छा मुझ बुरे को मेरे हक़ में है क्या इर्शाद, या ग़ौस ! ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-क़ब्र-ओ-ग़म-ए-हश्र ख़ुदा-रा कर दो मुझ को शाद, या ग़ौस ! हसन मँगता है दे दे भीक दाता रहे ये राज-पाट आबाद, या ग़ौस ! शायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी ना'त-ख़्व...

मैं हूँ सुन्नी ख़ुदा के करम से दिल दीवाना है अहमद रज़ा का / Main Hun Sunni Khuda Ke Karam Se Dil Deewana Hai Ahmad Raza Ka

मैं हूँ सुन्नी ख़ुदा के करम से दिल दीवाना है अहमद रज़ा का मेरा मरकज़ नबी की 'अता से आस्ताना है अहमद रज़ा का हर क़दम पर नबी से वफ़ा की, रात-दिन मिदहत-ए-मुस्तफ़ा की 'इश्क़-ए-ख़ैर-उल-वरा से मुज़य्यन शा'इराना है अहमद रज़ा का शान-ओ-शौकत में सब से जुदा है, 'इल्म-ओ-हिकमत की वो दर्स-गाह है जो बना रहबर-ए-अहल-ए-सुन्नत वो घराना है अहमद रज़ा का ज़िक्र उन का, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! कम न होगा जहाँ से कभी भी बज़्म-ए-'उश्शाक़ में ज़िक्र जारी वालिहाना है अहमद रज़ा का शायर: शौक़ फ़रीदी ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी mai.n hu.n sunni KHuda ke karam se dil deewana hai ahmad raza ka mera markaz nabi ki 'ata se aastaana hai ahmad raza ka har qadam par nabi se wafa ki raat-din mid.hat-e-mustafa ki 'ishq-e-KHair-ul-wara se muzayyan shaa'iraana hai ahmad raza ka shaan-o-shaukat me.n sab se juda hai 'ilm-o-hikmat ki wo dars-gaah hai jo bana rahbar-e-ahl-e-sunnat wo gharaana hai ahmad raza ka zikr un ka, ai Shauq-e-Fareedi ! kam na hoga jahaa.n me.n kabhi bh...

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया / Wohi Rab Hai Jis Ne Tujh Ko Hamatan Karam Banaya

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया हमें भीक माँगने को तेरा आस्ताँ बताया तुझे हम्द है, ख़ुदाया ! तुम्हीं हाकिम-ए-बराया, तुम्हीं क़ासिम-ए-'अताया तुम्हीं दाफ़े'-ए-बलाया, तुम्हीं शाफ़े'-ए-ख़ताया कोई तुम सा कौन आया वो कुँवारी पाक मरयम, वो "नफ़ख़्तु-फ़ीह" का दम है 'अजब निशान-ए-आ'ज़म, मगर आमिना का जाया वही सब से अफ़्ज़ल आया यही बोले सिदरा वाले, चमन-ए-जहाँ के थाले सभी मैं ने छान डाले, तेरे पाए का न पाया तुझे यक ने यक बनाया फ़-इज़ा फ़रग़्त फ़न्सब, ये मिला है तुम को मंसब जो गदा बना चुके अब उठो वक़्त-ए-बख़्शिश आया करो क़िस्मत-ए-'अताया व-इलल-इलाहि-फ़र्ग़ब, करो 'अर्ज़ सब के मतलब कि तुम्हीं को तकते हैं सब, करो उन पर अपना साया बनो शाफ़े'-ए-ख़ताया अरे ऐ ख़ुदा के बंदो ! कोई मेरे दिल को ढूँडो मेरे पास था अभी तो, अभी क्या हुआ ख़ुदाया ! न कोई गया न आया हमें, ऐ रज़ा ! तेरे दिल का पता चला ब-मुश्किल दर-ए-रौज़ा के मुक़ाबिल वो हमें नज़र तो आया ये न पूछ कैसा पाया कभी ख़ंदा-ज़ेर-ए-लब है, कभी गिर्या सारी शब है कभी ग़म कभी तरब है, न सबब समझ में आया न उसी ने कुछ बताया ...

ये बिल-यक़ीं हुसैन है नबी का नूर-ए-ऐन है / Ye Bil Yaqeen Hussain Hai Nabi Ka Noor-e-Ain Hai

लिबास है फटा हुआ, ग़ुबार में अटा हुआ तमाम जिस्म-ए-नाज़नीं छिदा हुवा, कटा हुआ ये कौन ज़ी-वक़ार है ! बला का शह-सवार है ! कि है हज़ारों क़ातिलों के सामने डटा हुआ ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है ये कौन हक़-परस्त है, मय-ए-रज़ा-ए-मस्त है कि जिस के सामने कोई बुलंद है न पस्त है उधर हज़ार घात है, मगर 'अजीब बात है कि एक से हज़ार-हा का हौसला शिकस्त है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है दिलावरी में फ़र्द है, बड़ा ही शेर-मर्द है कि जिस के दबदबे से रंग दुश्मनों का ज़र्द है हबीब-ए-मुस्तफ़ा है ये, मुजाहिद-ए-ख़ुदा है ये जभी तो इस के सामने ये फ़ौज गर्द-बर्द है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है उधर सिपाह-ए-शाम है, हज़ार इंतिज़ाम है उधर हैं दुश्मनान-ए-दीं, इधर फ़क़त इमाम है मगर 'अजीब शान है, ग़ज़ब की आन-बान है कि जिस तरफ़ उठी है तेग़ बस ख़ुदा का नाम है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐ...

ये वक़्त की निदा है रमज़ान जा रहा है | अल-वदा माह-ए-रमज़ाँ / Ye Waqt Ki Nida Hai Ramzan Ja Raha Hai | Alvida Mah-e-Ramzan

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा है रब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है नेकी बस इक कमाओ, लाखों में अज्र पाओ अल्लाह की रहमतों का ला-फ़ानी सिलसिला है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अब ग़फ़लतों को छोड़ो, मालिक से रिश्ता जोड़ो अगले बरस में क्या हो, कब कौन जानता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! माह-ए-सियाम का बस इतना सा फ़लसफ़ा है शैतान को सज़ा है, रहमान की 'अता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! शर्मिंदगी के आँसू रहमत के अब्र लाएँ बंदों का अपने रब से क्या ख़ूब राब्ता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा है रब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है शा...

मुस्तफ़ा का ख़ुदा और ख़ुद मुस्तफ़ा / Mustafa Ka Khuda Aur Khud Mustafa

मुस्तफ़ा का ख़ुदा और ख़ुद मुस्तफ़ा क्यूँ कहूँ मेरा कोई सहारा नहीं मैं मदीने से लेकिन बहुत दूर हूँ ये ख़लिश मेरे दिल को गवारा नहीं आप का 'इश्क़ है 'इश्क़-ए-रब्ब-उल-'उला आप का ज़िक्र है ख़ास ज़िक्र-ए-ख़ुदा ख़ुद ख़ुदा ने ये क़ुरआँ में ए'लाँ किया जो तुम्हारा नहीं वो हमारा नहीं इस्म-ए-अहमद की ता'ज़ीम के मुन्किरो ! इस की 'अज़मत को क़ुरआन से देख लो बे-लक़ब उन का इस्म-ए-मुबारक कहीं उन के मा'बूद ने भी पुकारा नहीं ठोकरों के सिवा और पाएगा क्या जिस की मंज़िल का कोई न हो रहनुमा अपनी मंज़िल पे हरगिज़ न पहुँचेगा वो हाथ में जिस के दामन तुम्हारा नहीं 'अक़्ल-ए-जिन्न-ओ-बशर का यहाँ ज़िक्र क्या सिदरा वाले जहाँ दंग-ओ-हैरान हैं रिफ़'अत-ए-मुस्तफ़ा की मिले हद किसे ये वो दरिया है जिस का किनारा नहीं वो ही रौज़े पे बुलवाएँगे एक दिन ऐ सिकंदर ! ज़रा सब्र से काम ले उन के दर का गदा और मायूस हो मेरे सरकार को ये गवारा नहीं ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी mustafa ka KHuda aur KHud mustafa kyu.n kahu.n mera koi sahaara nahi.n mai.n madine s...

ख़ुदा का नूर है ग़ालिब / Khuda Ka Noor Hai Ghalib (Part 1 | Part 2)

ज़मीनों आसमानों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब चमकते चाँद तारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब जो खिलते हैं, महकते हैं, चमन में फूलों को देखो यहाँ के लाला-ज़ारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब कहीं पे फूल खिलते हैं, कहीं मुरझाने लगते हैं ख़ज़ानों में, बहारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब वो जिस ने सारे 'आलम को समाया है, सजाया है पहाड़ों, आबशारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब तसव्वुर में, तख़य्युल में उसे महसूस करता हूँ समंदर, रेग-ज़ारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब मुबारक हो तुम्हें, ग़ालिब ! सना-ख़्वानी, मदह-ख़्वानी किताबुल्लाह के पारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब शायर: अज़ीज़ुल्लाह ग़ालिब ना'त-ख़्वाँ: आइशा अब्दुल जब्बार मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी चिड़ियों की चहकार में तू साँसों की तकरार में तू फूलों की महकार में तू गुलशन में गुलज़ार में तू चमन में, लाला-ज़ार में तू दरियाओं की धार में तू सहरा में कोहसार में तू चोटी पर और ग़ार में तू आक़ा के रुख़्सार में तू और उन के अनवार में तू यूँ ज़ुल्फ़-ए-ख़मदार में तू तू ही तू सरकार में तू सिद्दीक़ी दरबार में तू फ़ारूक़ी अदवार में तू 'उस्माँ के किरदा...

इश्क़ हमारा हैदर है / Ishq Hamara Haider Hai

मौला ! मौला ! मौला ! मौला ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगार ला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है नाज़-ए-शह-ए-कौनैन है वो, बाबा-ए-हसनैन है वो शौहर-ए-सय्यिदा-ज़हरा, क़ल्ब-ओ-जिगर का चैन है वो नाइब-ए-आक़ा हैदर है, चौथा ख़लीफ़ा हैदर है दीं पे फ़िदा है, जान-ए-वफ़ा है, रब का प्यारा हैदर है 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है 'अली नूँ याद करो रल के फ़रियाद करो है ग़रीबाँ दा एहो आसरा 'अली साडे दिलाँ विच, 'अली साडे सावाँ विच 'अली साडे आसे-पासे, 'अली ए निगावाँ विच 'आशिक़ाँ दे डेरे बरी 'अली दियाँ रावाँ विच रब रखे सारियाँ नूँ 'अली दी पनावाँ विच नफ़्स-ए-नबी हैदर मौला, रब का वली हैदर मौला दोनों जहाँ में है बेशक अख़ी-ए-नबी हैदर मौला ख़ुल्द का रस्ता हैदर है, 'इल्म का दरिया हैदर है जान-ए-पयम्बर, बोले क़लंदर, विर्द हमारा हैदर है...

मेरा दिल और मेरी जान मदीने वाले / Mera Dil Aur Meri Jaan Madine Wale

मेरा दिल और मेरी जान मदीने वाले ! तुझ पे सौ जान से क़ुर्बान, मदीने वाले ! भर दे भर दे, मेरे दाता ! मेरी झोली भर दे अब न रख बे-सर-ओ-सामान, मदीने वाले ! सब के मतलूब का महबूब है, मतलूब है तू अल्लाह अल्लाह रे ! तेरी शान, मदीने वाले ! काम आती है तेरी ज़ात हर इक दुखिया के मेरी मुश्किल भी हो आसान, मदीने वाले ! फिर तमन्ना-ए-ज़ियारत ने किया दिल बेचैन फिर मदीने का है अरमान, मदीने वाले ! लिख दे लिख दे मेरी क़िस्मत में मदीना लिख दे है तेरी मिल्क क़लम-दान, मदीने वाले ! हश्र में तुम मेरे 'ऐबों को छुपाए रखना हूँ गुनाहों पे पशेमान, मदीने वाले ! तेरा दर छोड़ के जाऊँ तो कहाँ जाऊँ मैं मेरे आक़ा मेरे सुलतान मदीने वाले ! सग-ए-तयबा मुझे सब कह के पुकारें, बेदम ! यही रक्खें मेरी पहचान, मदीने वाले ! शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी अब्दुल हबीब अत्तारी मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी mera dil aur meri jaan madine waale ! tujh pe sau jaan se qurbaan, madine waale ! bhar de bhar de, mere daata ! meri jhooli bhar de ab na rakh be-sar-o-saamaan, madine waale ! ...

या ग़ौस पाक अज करम करो / Ya Ghous Pak Aj Karam Karo

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ ! मीर-ए-मीराँ ! पीर-ए-पीराँ ! अल-मदद अल-मदद अल-मदद, या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! अल-मदद अल-मदद अल-मदद, या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस पाक ! अज करम करो अज करम कमाउण दा वेला ए मेरी झोली भर दो, या मीराँ ! अज दान करण दा वेला ए या ग़ौस पाक ! अज करम करो अज करम कमाउण दा वेला ए सारा जग केहंदा तैनूँ मीराँ मीराँ सारा जग केहंदा तैनूँ मीराँ मीराँ सुण मीराँ ! 'अर्ज़ ग़रीबाँ दी तेरे हथ इच डोर नसीबाँ दी अज बिगड़ी बना, शाह-ए-जीलाँ ! अज बिगड़ी बनाउण दा वेला ए या ग़ौस पाक ! अज करम करो अज करम कमाउण दा वेला ए असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरे हाथ में हाथ मैं ने दिया है तेरे हाथ है लाज, या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! निकाला है पहले तो डूबे हुओं को और अब डूबतों को बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! कहे किस से जा कर हसन अपने दिल की सुने कौन तेरे सिवा, ग़ौस-ए-आज़म ! ए सदक़ा ख़्वाजा मु'ईन दा ए नाले क़ुत्ब फ़रीदुद्दीन दा ए रहमत दी बारिश हो जावे रहमत बरसाउण दा वेला ए या ग़ौस पाक ! अज करम करो अज करम कमाउण दा वेला ए ऐ पीर-ए-पीराँ ! अल-मदद ऐ मीर-ए-म...